स्कूल की किताबों में, किसी क्विज शो में, या फिर सरकारी नौकरी के एग्जाम्स में अक्सर एक सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है – “भारत का पहला राष्ट्रपति कौन था?”
हम में से ज़्यादातर लोग इसका जवाब जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे पहले राष्ट्रपति इतने होनहार थे कि उनकी कॉपी चेक करने वाले टीचर ने लिख दिया था कि “एग्जाम देने वाला, एग्जामिनर से ज़्यादा होशियार है”? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं डॉ. राजेंद्र प्रसाद की।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम सिर्फ उनका नाम नहीं जानेंगे, बल्कि उनकी ज़िंदगी के उन पन्नों को पलटेंगे जो वाकई में हर हिंदुस्तानी के लिए एक इंस्पिरेशन (प्रेरणा) हैं। तो चलिए, बिना किसी देरी के शुरू करते हैं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद: एक नज़र में
लंबे पैराग्राफ पढ़ने से पहले, आइए उनके बारे में कुछ ज़रूरी बातें जल्दी से जान लेते हैं: जानकारी का प्रकार डिटेल्स
- पूरा नाम डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- जन्म 3 दिसंबर 1884 (ज़ीरादेई, बिहार)
- राष्ट्रपति कार्यकाल 26 जनवरी 1950 – 13 मई 1962
- सबसे बड़ा अवॉर्ड भारत रत्न (1962)
- पेशा (शुरुआती) वकील (Lawyer) और प्रोफेसर

बचपन और वो तेज़ दिमाग जिसने सबको हैरान कर दिया
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म बिहार के सीवान ज़िले के एक छोटे से गाँव ‘ज़ीरादेई’ में हुआ था। बचपन से ही पढ़ाई में उनका कोई मुकाबला नहीं था। उन्होंने कोलकाता (तब कलकत्ता) की प्रेसीडेंसी कॉलेज से अपनी पढ़ाई की।
उनके तेज़ दिमाग का एक किस्सा बहुत मशहूर है। जब वो यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे, तब उनकी आंसर-शीट (उत्तरपुस्तिका) देखकर एग्जामिनर इतना इम्प्रेस हुआ कि उसने कॉपी पर लिख दिया – “The examinee is better than the examiner”(यानी परीक्षा देने वाला, परीक्षा लेने वाले से ज़्यादा काबिल है)। यह कोई छोटी बात नहीं थी। आगे चलकर उन्होंने वकालत की पढ़ाई की और एक बेहद कामयाब और पैसे वाले वकील बने।
आज़ादी की लड़ाई में एंट्री और गांधी जी का साथ
उनकी ज़िंदगी बढ़िया चल रही थी, वकालत में खूब पैसा था, लेकिन देश को उनकी ज़रूरत थी। जब महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण में किसानों के हक़ के लिए आंदोलन (चंपारण सत्याग्रह) शुरू किया, तब राजेंद्र बाबू ने अपनी चलती हुई वकालत छोड़ दी और गांधी जी के साथ जुड़ गए।
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) हो या भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement), वो हर मोर्चे पर आगे रहे और इसके लिए उन्होंने कई साल जेल में भी काटे।
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संविधान बनाने में उनका अहम रोल
जब देश आज़ाद होने वाला था और तय हुआ कि भारत का अपना एक कानून यानी ‘संविधान’ होगा, तो इसके लिए ‘संविधान सभा’ (Constituent Assembly) बनाई गई। इस सभा का अध्यक्ष (President) डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चुना गया।
सोचिए, यह कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी थी! अलग-अलग विचारों वाले नेताओं को एक साथ लेकर चलना और देश का संविधान तैयार करवाना कोई आसान काम नहीं था। लेकिन अपनी समझदारी और शांत स्वभाव की वजह से उन्होंने इस काम को बखूबी निभाया।
राष्ट्रपति भवन में एक ‘आम’ इंसान की सादगी
26 जनवरी 1950 को जब हमारा संविधान लागू हुआ, तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर चुना गया। वो भारत के अकेले ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने लगातार दो बार (Two consecutive terms) इस पद को संभाला।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि देश का सबसे बड़ा पद मिलने के बाद भी उनका रहन-सहन एकदम साधारण रहा।
- सैलरी कम ली: राष्ट्रपति के तौर पर उनकी सैलरी 10,000 रुपये तय हुई थी, लेकिन वो सिर्फ 50% सैलरी (5,000 रुपये) ही लेते थे। बाद में तो उन्होंने इसे और भी कम करके सिर्फ 2,500 रुपये कर दिया था।
- ज़मीन से जुड़े रहे: राष्ट्रपति भवन की चमक-धमक उन्हें कभी बदल नहीं पाई। वो हमेशा ज़मीन पर बैठकर अपना काम करना पसंद करते थे और अपने कपड़े खुद धोते थे।
निष्कर्ष
“भारत का पहला राष्ट्रपति कौन था” इस सवाल का जवाब सिर्फ एक नाम नहीं है, बल्कि एक ऐसे इंसान की कहानी है जिसने अपना पूरा जीवन देश के लिए लगा दिया। 1962 में रिटायर होने के बाद उन्हें देश के सबसे बड़े सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाज़ा गया। अपने आखिरी दिन उन्होंने पटना के सदाकत आश्रम में एक आम इंसान की तरह बिताए। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन हमें सिखाता है कि आप चाहे कितने भी बड़े पद पर पहुँच जाएं, अपनी सादगी और जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
सवाल 1: भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल कितने साल का था?
जवाब: उनका कार्यकाल 12 साल से ज़्यादा का था (26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक)। वो भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति रहने वाले व्यक्ति हैं।
सवाल 2: डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था?
जवाब: उनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के ज़ीरादेई गाँव (सीवान ज़िला) में हुआ था।
सवाल 3: भारत के पहले राष्ट्रपति को ‘भारत रत्न’ कब मिला था?
जवाब: राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद, साल 1962 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

